यरूशलम। अंतरराष्ट्रीय विमानन जगत में इजरायल के एक नए फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फ्लाईदुबई विमान से जुड़ी कथित हाईजैकिंग कोशिश के बाद इजरायल ने अपनी हवाई सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव किया है। इस फैसले का असर उन विदेशी एयरलाइंस के पायलटों और केबिन क्रू सदस्यों पर पड़ रहा है, जिनके पास कुछ विशेष देशों की नागरिकता है।
इस घटनाक्रम के बाद फ्रांस की प्रमुख विमानन कंपनी एयर फ्रांस ने भी इजरायल के नए नियमों का पालन करने की पुष्टि की है। कंपनी ने अपने कर्मचारियों को तेल अवीव जाने वाली उड़ानों से संबंधित नए निर्देशों की जानकारी दी है।
पड़ेगा असर
इजरायल की नई नीति के तहत करीब कई देशों के नागरिकों को प्रभावित बताया गया है। इनमें पाकिस्तान, ईरान, सऊदी अरब, ओमान, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया और नाइजर जैसे देश शामिल हैं। इन देशों के ऐसे नागरिकों को इजरायल के हवाई क्षेत्र में उड़ान संचालित करने वाली विदेशी एयरलाइंस के क्रू में शामिल करने पर रोक लगाई गई है।
इस नियम में दोहरी नागरिकता रखने वाले कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। यानी किसी व्यक्ति के पास संबंधित देशों में से किसी एक की नागरिकता होने पर भी वह नए नियम के दायरे में आ सकता है।
फ्लाईदुबई की उड़ान में क्या हुआ था?
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि फ्लाईदुबई की एक उड़ान से जुड़ी घटना है। रिपोर्ट के अनुसार, एक ओमानी सह-पायलट पर विमान को हाईजैक करने की कोशिश करने का आरोप लगा था। उस समय भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर ने विमान को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई थी। घटना के बाद इजरायल ने विदेशी एयरलाइंस के लिए क्रू सदस्यों की नागरिकता से संबंधित नए निर्देश जारी किए।
एयर फ्रांस ने की नियमों के पालन की पुष्टि
एयर फ्रांस ने स्पष्ट किया है कि जिन देशों में वह अपनी सेवाएं देती है, वहां के प्रवेश और संचालन संबंधी नियमों का पालन करना उसकी जिम्मेदारी है। कंपनी ने कहा कि तेल अवीव जाने वाली उड़ानों के लिए इजरायली अधिकारियों की ओर से जारी नए नियमों के बारे में संबंधित कर्मचारियों को सूचित कर दिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठ सकते हैं सवाल
इजरायल के इस फैसले ने विमानन सुरक्षा और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। एक तरफ देश अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीयता के आधार पर कर्मचारियों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ सकते हैं।
अब देखना होगा कि इजरायल की इस नई नीति का अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के संचालन और विमानन क्षेत्र में रोजगार व्यवस्था पर कितना व्यापक प्रभाव पड़ता है।
लेख: इंटरनेशनल डेस्क | विशेष रिपोर्ट













